25 जून 2025 – यह तारीख अब भारत के अंतरिक्ष इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई है। ठीक 41 साल बाद, भारत ने फिर से एक मानव को अंतरिक्ष में भेजकर गर्व, विज्ञान और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान भरी है।
इस ऐतिहासिक मिशन के नायक बने Group Captain शुभांशु शुक्ला, जो अमेरिका के SpaceX Falcon 9 रॉकेट से रवाना हुए और Axiom-4 मिशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर यात्रा पर निकले। राकेश शर्मा के 1984 के बाद यह पहला मौका था जब कोई भारतीय अंतरिक्षवासी अंतरिक्ष की ओर निकला — और वह भी पूरी दुनिया की निगाहों के सामने।
शुभांशु शुक्ला की लॉन्चिंग जैसे ही हुई, देशभर में गर्व और उत्साह की लहर दौड़ पड़ी। सोशल मीडिया से लेकर संसद तक, हर जगह सिर्फ एक ही बात हो रही थी: “भारत फिर से गगन को छूने निकला है!”
इस मिशन में शुभांशु वैज्ञानिक प्रयोगों, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च और अंतरिक्ष-आधारित पृथ्वी अवलोकन कार्यों को अंजाम देंगे। उनकी यात्रा लगभग 14 दिन की है, लेकिन इसका असर पीढ़ियों तक महसूस किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर इसे “भारत के लिए नया युग” बताया और कहा कि,
“आज हमने सिर्फ अंतरिक्ष में कदम नहीं रखा, बल्कि अपने सपनों को आसमान से जोड़ दिया है।”
यह मिशन न केवल ISRO और भारत की वैज्ञानिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे युवाओं के लिए एक प्रेरणा है कि कुछ भी असंभव नहीं।
अब जब भारत ने फिर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छुआ है, तो अगली मंज़िल—मंगल और उससे आगे!
भारत अब सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं, अब गगन भी हमारा है!







